नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता ने कहा है कि दलितों का सशक्तीकरण हिंदुत्व के विचार और भारतीय संविधान के मूल में निहित है और भारत की आजादी के 75 वर्षों में उनके सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने बृहस्पतिवार को न्यूजर्सी में ‘‘इंडिक डायलॉग’’ के पहले संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि दलितों के संबंध में भेदभाव के बारे में अधिक बात की जाती है, जबकि यह जानना महत्वपूर्ण है कि दलितों का सशक्तीकरण हिंदुत्व विचार और भारतीय संविधान के मूल में कैसे निहित है। पासवान वर्तमान में अमेरिका के दौरे पर हैं। उन्होंने ‘‘दलित बहुजन एकजुटता नेटवर्क’’ पर सिलिकॉन वैली के साथ-साथ लॉस एंजिलिस में लोगों को संबोधित किया। लॉस एंजिलिस में उन्होंने ‘‘दलित, बहुजन और हिंदुत्व’’ कार्यक्रम में प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत की और कैलिफोर्निया में सैन जोस फ्रेमोंट में फाउंडेशन फॉर इंडिया और इंडियन डायस्पोरिक स्टडीज (एफआईआईडीएस) में ‘‘भारत सरकार की समावेशिता और विविधता की नीतियां’’ पर चर्चा की। पटना विश्वविद्यालय में कानून के विषय के सहायक प्रोफेसर पासवान ने न्यूजर्सी में लोगों से कहा कि ‘‘रामायण, महाभारत और भारत का संविधान तीन दस्तावेज हैं जो हिंदुओं और भारत को परिभाषित करते हैं’’।
गुरु प्रकाश पासवान ने पूछा, ‘‘जब तीनों को दलितों ने लिखा है (ऋषि वाल्मीकि द्वारा रामायण, वेद व्यास द्वारा महाभारत और भारत के संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार भारतीय संविधान), तो दलित के भारत का हिस्सा नहीं होने का सवाल कहां है?’’ पासवान ने जोर देकर कहा कि भारत में दलितों पर हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न के इतिहास को न तो नकारा जा सकता है और न ही कम किया जा सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारत 1950 (26 जनवरी, 1950, जब भारत गणराज्य ने संविधान को अपनाया) के बाद से दलित सशक्तीकरण को स्थापित करके क्या कर रहा है और परिणामों को भी देखें।’’ प्रेस में दिए एक बयान में कहा गया है कि भाजपा नेता ने आरक्षण (राज्य द्वारा सकारात्मक कार्रवाई) जैसे मुद्दे, दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स, आंबेडकर, बाबू जगजीवन राम (जिनके बारे में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने कहा था कि वह सबसे कठोर रक्षा मंत्री हैं), पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, साथ ही वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (भारत की राष्ट्रपति बनने वाली पहली आदिवासी महिला) जैसे प्रतिष्ठित दलित नेताओं के प्रभाव के बारे में बात की।
पासवान ने इस बारे में भी बात की कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन की विभिन्न पहल जैसे ‘‘पीएम मुद्रा’’, स्वच्छ भारत मिशन, राज्यपाल की नियुक्ति, राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कारों के लिए दलितों की मान्यता ने दलित सशक्तीकरण के उनके एजेंडे को मजबूती प्रदान करना जारी रखा है। अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकियों के संघर्षों और कैसे भारत से कुछ सीख को अमेरिकी राजनीति और शासन पर लागू किया जा सकता है, पर चर्चा की। इंडिक डायलॉग में वुडब्रिज ह्यूमन राइट्स कमीशन (एचआरसी) के अध्यक्ष ग्लेन मॉर्गन, वुडब्रिज एचआरसी कमिश्नर रेशमा अली, अक्षर सिदाना, वुडब्रिज टाउनशिप स्कूल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड ऑफ एजुकेशन (डब्ल्यूटीएसडी बीओई) के सदस्य और वुडब्रिज पब्लिक लाइब्रेरी (डब्ल्यूपीएल) की निदेशक मोनिका एपिंगर ने भाग लिया। कमिश्नर मॉर्गन और अली ने कहा कि उन्होंने भारत, हिंदुत्व और दलित मुद्दों के बारे में सीखा तथा इस बारे में और अधिक कार्य किए जाने की जरूरत है।





































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