Home Blog कोरोना की जंग में आखिर कहां चूक रहे हैं हम: पूरन डावर

कोरोना की जंग में आखिर कहां चूक रहे हैं हम: पूरन डावर

2642
28

शताब्दी की भयंकर त्रासदी, सामयिक एवं साहसिक निर्णय ,अद्भुत प्रेरणा, अद्भुत अनुपालन, अद्भुत जन अनुमोदन, अदभुत सेवा का जज़्बा… जोश के साथ शुरुआत, लेकिन सामान्यतः जैसा होता आया है जोश के साथ होश का खोना, अतिउत्साह भी क्रियान्वन को अदूरदर्शी बना देता है।

लेखक, चिंतक, विश्लेषक- पूरन डावर

22 मार्च को प्रधानमंत्री द्वारा एक सामयिक और साहसिक निर्णय 130 करोड़ आबादी वाले देश का लॉकडाउन, एक असम्भव दिखने वाला निर्णय, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी जाने जाते है ऐसे कठोर निर्णयों के लिये, एक विलक्षण प्रतिभा के धनी है जनता को तमाम राजनैतिक एवं धार्मिक गतिरोधों के बावजूद प्रेरित करने की असीमित क्षमता उन्हें भारत में ही नही बल्कि विश्व में अग्रिम पंक्ति मे खड़ा करती है।

एक दिन के पूर्ण लॉकडाउन की सफलता के बाद 21-21 दिन के दो और लॉकडाउन असम्भव पहाड़ जैसी चुनौती न केवल पूरी होने जा रही है, बल्कि कई राज्य अभी इस लॉकडाउन को और बढ़ाने पर भी विचार कर रहे है और जो संक्रमित राज्य है उन्हें अभी इस दंश को झेलना ही होगा।

भारत में नौकरशाही द्वारा क्रियान्वन सदैव प्रश्नचिन्ह रही है, इस बार सकारात्मकता के साथ अद्भुत क्रियान्वन प्रारम्भ हुआ, जनता का अनुशासन हो, पुलिस की एक नयी भूमिका, डंडा कम स्नेह अधिक, मार डंडे से नहीं स्नेह तरह-तरह के प्रयोगों से। अपनी परवाह किये बिना जनता दुख दर्द के साथ, घर-घर रोटी, राशन की व्यवस्था पहली बार पुलिस के पास और कमाबेश ईमानदारी के साथ जरूरतमंदों तक पहुंची। यह बात दीगर है कि भारत में जरूरतमंदों की संख्या और उसके साथ इकठ्ठा करने की प्रवृत्ति में शिकायतें स्वाभाविक हैं।

फिर भी त्राहि-त्राहि, आखिर चूक कहाँ हुयी। कहते है जोश के साथ अक्सर होश की कमी रहती है, वही हुआ। यह पहला समय नहीं है जहाँ नौकरशाही ने सरकार को खुश करने में होश न खोया हो, संजय गाँधी के जनसंख्या नियंत्रण जैसे अभूतपूर्व कार्यक्रम का वीभत्स नसबन्दी के रूप में हश्र हमने देखा है। यहाँ भी यही हुआ, सबसे पहले इसके शिकार निजी अस्पताल बनें, जिन पर सारा दारोमदार या इस समय कोरोना की चुनौती से कई गुने होने जा रहे रोगियों के उपचार का उन्हें लगभग बन्द कर दिया गया या बन्द करने को मजबूर कर दिया गया। नियम इस तरह के बना दिये गये अधिकांश निजी अस्पताल ताला लगाने को मजबूर हो गये।

किसी भी अस्पताल में एक भी कोरोना संक्रमित हुआ तो उसे सील कर दरबाजे पर ताला लगा दिया गया, मरीज भी अन्दर तीमारदार भी अन्दर डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी अन्दर, मरीज बिना मौत मरने लगे। विडम्बना यह कि तीन-तीन, चार-चार दिन तक उनका टेस्ट भी नहीं, मरीज बिना डायलाइसिस, जच्चा बच्चा बिना खुराक, हृदय रोगी बिना वेंटीलेटर, ताले के अन्दर, कोरोना के इलाज का कतई अर्थ यह नहीं था कि गम्भीर रोगियों को जीते जी मौत के घाट उतार दिया जाय।

आईसीएमआर की गाइड लाइन हो या फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह ऐसे अस्पताल जिनमें कोरोना संक्रमित रोगी पाया जाता है, इलाज करा रहे रोगियों को अन्य अस्पताल में स्थानांतरित कर, स्टाफ यदि पूर्ण पीपीई किट में नहीं है तो क्वारंटाइन, अस्पताल को सेनेटाइज करके अधिकतम 48 घण्टे में पुनः कार्यदशा में लाना जो समय की माँग थी। कोरोना संदिग्ध जिनकी टेस्ट रिपोर्ट नहीं आयी है इलाज अस्पताल के रेड ज़ोन में… जिनकी कोरोना जाँच हो चुकी है उनका इलाज ग्रीन ज़ोन में।

कोरोना टेस्ट कुछ दिन पहले तक केवल सरकारी अस्पताल में हो सकते थे, टेस्टों की क्षमता नाम मात्र थी, एक शहर में एक दिन में 50-100 भी नहीं, जबकि हर जिले में आम रोगी भी हजारों की संख्या में होते हैं, निजी अस्पतालों का क्या कसूर था, कहाँ से सबका टेस्ट कराकर रोगी को दाखिल करते। अधिकांशतः निजी अस्पताल बन्द हो गये और राजकीय चिकित्सा पहले से ही पंगु है। आगरा के एसएन मेडीकल कॉलेज के आकस्मिक विभाग को अगर देख लें तो लगेगा झोला छाप लाख गुने अच्छे हैं। त्राहि-त्राहि स्वाभाविक थी।

यही हश्र क्वारंटाइन सेंटर्स का हुया, किसी भी स्कूल, कॉलेज, शादीघर को क्वारंटाइन सेंटर बना दिया गया, बिना किसी व्यवस्था के। उसमें नहाने, धोने, किसी सेवा हाउस कीपिंग, डाक्टर की व्यवस्था तक नहीं है, और उस पर भी बंद कर द्वार पर ताला। हश्र यह हुआ कि भोजन गेट के बाहर से फेंक कर दिया जाने लगा। जिसके चित्रों- वीडियों से आगरा की छवि नहीं बल्कि पूरे विश्व में भारत की छवि धूमिल हुयी।

सरकार का ध्यान गरीब जनता पर होना भी चाहिये, आखिर सबसे मुश्किल की घड़ी रोजमर्रा मज़दूरों की है, उन पर बिना किसी कसूर के पहाड़ टूटा है। लेकिन उनकी उपेक्षाओं को सीमित, संयमित रखने के बजाय असीमित बढ़ा दी गयी। सभी कुछ मुफ्त। विडम्बना यह है कि क्वारंटाइन सेंटर में जिनकी खर्च की अच्छी क्षमता है उसे भी मुफ्त का नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी हैं। संत पुरूष हैं। उनके लिये मानवीय पहलू सस्ता इलाज उनकी प्राथमिकता है, अच्छी बात है लेकिन वास्तविकता से और आज की आवश्यकता से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता।

कोरोना टेस्ट निजी लेब में 4500 रुपये निर्धारित किये गये, उत्तर प्रदेश सरकार ने घटाकर 2500 कर दिये। टेस्ट सुविधा बन्द हो गयी, बिना टेस्ट के अस्पताल सील होने का जोखिम, गम्भीर रोगी फिर भगवान भरासे, आखिर पुनः स्पष्टीकरण हुआ। पुनः 4500 रुपये पर टेस्ट शुरू हुये, पूरी त्रासदी में सरकार की मंशा अच्छी एवं नीतियों में दूरदर्शिता की कमी कहें या जनता को अधिक राहत देने का अतिरेक।

प्रधानमंत्री के भाषण मुझे अक्षरत है स्मरण है कि कोई भी खान-पान की व्यवस्था, दवाई-इलाज पर कतई रोक नहीं है, दूर से ही डाक्टर को पर्चा दिखाने पर जाने दिया जायेगा। यह तो दूर की कोढ़ी बन गयी।

यह लड़ाई अभी लम्बी है हमें अपनी मानसिकता एवं व्यवस्था दोनों दुरूस्त करनी होंगी, पूरी चिकित्सा व्यवस्था निजी हो या सरकारी दोनों को दुरुस्त करना होगा। निजी अस्पताल में रोगियों की भर्ती के लिये सामान्यतः कोरोना टेस्ट होना चाहिये जो सक्षम है निजी लैब से जो सक्षम नहीं हो प्राथमिकता पर सरकारी लैब से, गम्भीर रोगी 48 घण्टे टेस्ट की प्रतीक्षा नहीं कर सकता है, उसे बिना टेस्ट के भर्ती की अनुमति होनी चाहिये। जोखिम का डर निकालना होगा, निजी एवं सरकारी डाक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टाफ पूरी तरह सुरक्षित पीपीई किट में अनिवार्य कर दिया जाये।

कोरोना के जोखिम को कम करना होगा

  • यदि कोई संक्रमित मिलता है तो तुरन्त सेनेटाइज कर उस वार्ड (रेड ज़ोन) को असंक्रमित तुरंत पुनः सेवा में लाना चाहिये।
  • कोरोना संक्रमित का इलाज हर जिले मे प्राइवेट अस्पताल में भी होना चाहिये सक्षम लोग प्राइवेट में करायें, ताकि गरीबों के लिये सरकारी अस्पतालों की बेहतर व्यवस्था हो सके।
  • इसी तरह क्वारंटाइन सेंटर भी निजी क्षेत्र में हो, बिना लक्षण के संक्रमित घर में, अपने बजट के अनुसार होटल या अस्पताल में क्वारंटाइन हो सकता है। सरकार को अपने ऊपर से बोझ कम करना होगा।

सकारात्मक पहलू यह है कि अगले 40 वर्ष भारत की तपस्या के है, भारत का भविष्य उज्जवल है 2025 तक ही अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डालर को छुएगी ऐसी पूरी आशा है।

लेखक, चिंतक, विश्लेषक- पूरन डावर

28 COMMENTS

  1. Nhắc đến sân chơi giải trí trực tuyến uy tín, không thể bỏ qua slot365 login link . Nhà cái sở hữu kho trò chơi phong phú từ thể thao, casino live đến slot game hiện đại, tỷ lệ trả thưởng cạnh tranh, mang lại trải nghiệm cá cược mượt mà và minh bạch. TONY01-29O

  2. Chumba Casino gives you FREE Sweeps Coins just for signing up. Enjoy hundreds of macumba slot games and redeem Sweeps Coins for cash prizes. The best social casino experience is waiting — jump in!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here