नई दिल्ली। भारत में मई के पहले सप्ताह में जिस तेजी से कोरोनावायरस संक्रमण फैल रहा है अब वह डरा रहा है। देश में 30 जनवरी को कोरोना का पहला केस सामने आया था जो अब 8 मई तक बढ़कर 56 हजार के पार पहुंच चुका है। यही नहीं, देश में पहले कोरोना के केस 15 दिन में दोगुने हो रहे थे जो अब मात्र 11 दिन में दोगुने हो रहे हैं।
भारत की तुलना में ये देश बेहतर
अगर जनवरी की बात करें तो कुल 20 देशों में से 13 ने भारत की तुलना में कोरोना महामारी से निपटने में बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत इस सूची में 7वें नंबर पर है। अमेरिका, इटली, फ्रांस, जर्मनी, चीन, कनाडा में स्थिति भारत से बुरी है।

पिछले 3 दिन से हर रोज देश में 2,000 से अधिक केस
पिछले 3 दिनों से देश में हर रोज 2 हजार से अधिक कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। मई महीना कोरोनावायरस के लिहाज से भारत के लिए बुरा साबित हो रहा है। अप्रैल में कोरोना मरीजों की संख्या में धीमी गति से बढ़ रही थी। लेकिन मई का महीना सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
भारत में कोरोना का सबसे ज्यादा ग्रोथ रेट
भारत में पिछले सप्ताह कोरोना मरीजों की संख्या बाकी अन्य 20 देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है। इन 20 देशों में से 9 में तो कोरोना मरीजों की संख्या 1% से भी कम की दर से बढ़ रही है। भारत में पिछले सप्ताह सबसे ज्यादा 6.7% की दर से कोरोना के मरीज बढ़े हैं। नेपाल में 6.1, यूएई में 4.2, सिंगापुर में 3.8, श्रीलंका में 3.2, कनाडा में 3.1, फिलीपींस में 2.8, अमेरिका में 2.5, फिनलैंड में 1.9, जापान में 1.5, मलेशिया में 1.3, इटली में 0.8, फ्रांस में 0.7, जर्मनी में 0.6, थाइलैंड में 0.2, ऑस्ट्रेलिया में 0, दक्षिण कोरिया और वियतनाम में 0.1, चीन में 0.005 और कंबोडिया में 0 फीसदी के दर से इस सप्ताह कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है।

अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा नए केस
अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा रोजाना नए केस सामने आ रहे है। देश में रोजाना बढ़ रहा कोरोना संक्रमण अब भारत के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। भारत में पिछले 7 दिनों में हर रोज करीब 2,500 केस सामने आए हैं। अमेरिका के अलावा किसी अन्य देश में इतने मामले रोजाना नहीं आ रहे हैं।
दूसरे देशों की तुलना में पिछड़ गया है भारत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 31 जनवरी तक 20 देशों में कोरोना मरीजों की संख्या 9,826 ही थी और इसमें से भी अकेले 9,720 मामले तो केवल चीन में थे। चीन के बाहर केवल थाइलैंड, सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया में 10 से ज्यादा मामले थे। लेकिन फरवरी और फिर मार्च में कोरोना पूरी दुनिया में फैल गया और लाखों लोगों की जान ले चुका है।

एम्स डायरेक्टर के बयान से टेंशन बढ़ी
इस बीच, एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि जून-जुलाई में कोविड का संक्रमण पीक पर होगा। अभी तक नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर जो भी इस पर मैथेमेटिकल और मॉडलिंग डेटा सामने आया है, उसके अनुसार यही अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में जून-जुलाई में कोविड संक्रमण पीक पर हो सकता है। इसलिए संक्रमण को लेकर अभी अलर्ट रहना है और इसके साथ हमें आगे भी बढ़ना है।
कोई लक्षण नहीं, इससे भी बढ़ा भारत का सिरदर्द
राजधानी में कोरोना के ऐसे केस बड़ी संख्या में सामने आए हैं, जिनमें कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए थे। अब एक नई स्टडी सामने आई है। इसमें कहा गया है कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे, उनमें इसकी एक वजह यह हो सकती है कि मरीज किसी सुगंध या दुर्गंध को महसूस ना कर पा रहे हों। यानी वह अपनी सूंघने की क्षमता खो चुके हों। हाल ही में इसे एनसीडीसी ने भी अपने नए लक्षणों में शामिल किया है, लेकिन इससे संबंधित कोई रिसर्च अभी तक देश में नहीं हुई है। अब मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में इससे संबंधित स्टडी शुरू की है।

कोरोना वायरस के रूप बदलने से बढ़ा संक्रमण
अमेरिका के लोस ऐलामोस नैशनल लेबोरेटरी न्यू मैक्सिको के वैज्ञानिक डॉ तन्मय भट्टाचार्य ने चेताया है कि कोरोना वायरस के नए रूप D614G इसे और ज्यादा संक्रामक बना रहा है। कोरोना वायरस के भारत में 82 प्रकार का विश्लेषण करने पर चला है कि इनमें से 50 फीसदी अपने रूप बदल रहे हैं। भारतीय मूल के प्रोफेसर एसएस वासन और कॉमनवेल्थ साइंटिफिक ऐंड इंस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के उनके सहयोगियों ने यह दावा किया है।
कोरोना के खिलाफ जंग में अहम आदेश
लॉकडाउन के बाद दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को ओडिशा सरकार वापस आ रही है। इसी बीच हाई कोर्ट ने नवीन पटनायक सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ उन्हें मजदूरों को राज्य में लाया जाए जो कोरोना वायरस निगेटिव हों।

महाराष्ट्र और गुजरात के आंकड़ों से बढ़ा टेंशन
महाराष्ट्र और गुजरात में जिस तेजी से कोरोना के नए केस बढ़ रहे हैं, वह आंकड़ा डराने वाला है। केंद्र सरकार के विशेषज्ञों की कमिटी ने मुंबई का दौरा कर वहां कोरोना रोकने की रणनीति पर चर्चा की है। अकेले महाराष्ट्र में कोरोना के करीब 19 हजार मरीज हैं। गुजरात में 7 हजार से ज्यादा कोरोना मरीज हैं। अभी तक महाराष्ट्र में करीब 800 लोगों की कोरोना से मौत हुई है जबकि गुजरात में 424 लोग मर चुके हैं।





































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