जयपुर। राजस्थान के बीकानेर और झुंझुनू से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि यह दोनों पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करते थे। इन दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए आर्मी, यूपी एटीएस और राजस्थान पुलिस ने मिलकर ऑपरेशन ‘डेजर्ट चेज’ चलाया था। राजस्थान पुलिस इंटेलिजेंस के एडिश्नल डायरेक्टर जनरल उमेश मिश्रा ने गिरफ्तारी की पुष्टि की।
पाकिस्तानी हैंडलर तक पहुंचाता था खुफिया जानकारी
इन पकड़े गए आरोपियों का नाम विकास और चिमन लाल है। विकास झुंझुनू का रहने वाला है। उसके पिता सेना से रिटायर्ड हैं। मालूम चला है कि वह बीकानेर में सेना से जुड़ी अहम जानकारियां पाकिस्तानी हैंडलर तक पहुंचाता था। जांच में मालूम चला है कि उसने अभी तक सेना की ऑर्डर ऑफ बेटल, कंपोजिशन, ऑर्डर ऑफ मिलिट्री फाइटिंग फॉर्मेशन, गोला-बारूद की फोटो और उससे जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाई है।

चिमन लाल से सूचनाएं लेता था, भाई के अकाउंट में पैसा मंगवाता था
सेना की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में पानी के टैंकर की सप्लाई करने वाले चिमन लाल से विकास सूचनाएं लेता था। चिमन पानी की सप्लाई के बहाने रेंज की तस्वीरें लेता था। किसी को शक न हो इसके लिए विकास अपने भाई हेमंत के अकाउंट में पाकिस्तान से पैसा मंगाता था। हाल ही में इसके लिए आईएसआई ने विकास को 75 हजार रुपये दिए थे। उसने इसे अपने भाई हेमंत कुमार के खातों में मंगवाया था। पुलिस ने हेमंत को भी हिरासत में ले लिया है।
लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस ने ट्रेस किया
अगस्त 2019 में लखनऊ की मिलिट्र्री इंटेलिजेंस टीम को गंगानगर के पास एक जासूसी एजेंट के बारे में जानकारी मिली थी। आरोपी की पहचान विकास कुमार के रूप में हुई थी। यह गंगानगर के पास एक सेना के गोला बारूद डिपो के आसपास ट्रेस किया गया। इसके बारे में जनवरी 2020 में एटीएस को सूचित किया गया। इसके बाद आर्मी की इंटेलीजेंस लगातार विकास की एक्टिविटी पर नजर बनाए हुए थी।

पानी सप्लायी रजिस्टर की तस्वीरें भी भेजता था
सूत्रों ने बताया कि चिमन लाल संविदा में नौकरी करता था। वह महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक पंप हाउस में पानी सप्लायी के रजिस्टर की तस्वीरें भी लेता था। इन तस्वीरों को चिमन लाल, विकास को देता था। फिर विकास इन्हें पाकिस्तानी हैंडलर तक पहुंचाता था। पिछले महीने आर्मी इंटेलीजेंस ने इसकी जानकारी राजस्थान पुलिस को दी थी।

फेसबुक पर ‘हनी ट्रैप’ के जरिए जाल में फंसाया
विकास ने बताया कि फेसबुक पर अनुष्का चोपड़ा नाम के अकाउंट से पिछले साल मार्च में उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। दोस्ती के बाद दोनों ने अपने वॉट्सएप नंबर एक-दूसरे को दिए। दोनों में चेट और वीडियो कॉल भी होने लगी। महिला ने उसे बताया कि वो मुंबई में कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी) मुख्यालय में काम कर रही है। इसके बाद उसने कई वॉट्सएप ग्रुप ज्वाइन कराए। इसमें वो पहले से जुड़ी थी। इसके बाद महिला ने विकास को अपने बॉस अमित कुमार सिंह (हैंडलर) से मिलवाया। वह एक भारतीय वॉट्सएप नंबर का इस्तेमाल करता था। हैंडलर ने विकास को पैसों के बदले सेना की सूचना देने के लिए तैयार कर लिया। विकास ने जो जानकारी हैंडलर को दी वे ज्यादातर चिमन लाल से ली थीं। जांच में सामने आया है कि अनुष्का और विकास नाम के शख्स पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए काम करते हैं।





































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