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सुप्रीम कोर्ट ने किसानों और सरकार को दी नसीहत, कही ये बात

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नई दिल्ली। किसान आंदोलन पर गुरुवार को सुनवाई शुरू होने के बाद CJI ने कहा कि हम प्रदर्शन के अधिकार को मानते है इसको हम इसको बाधित नही करेंगे। इस बीच वकील हरीश साल्वे ने कहा कि किसान आंदोलन की वजह से मिल्क, फ्रूट, सब्जियों के दाम बढ़ गए है। यह सामान बॉर्डर पार से आते हैं। तीन कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि वो फिलहाल कानूनों की वैधता तय नहीं करेगा।

सीजेआई ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज हम जो पहली और एकमात्र चीज तय करेंगे, वो किसानों के विरोध प्रदर्शन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर है। कानूनों की वैधता का सवाल इंतजार कर सकता है। चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि हमने कानून के खिलाफ प्रदर्शन के अधिकार को मूल अधिकार के रूप में मान्यता दी है। उस अधिकार में कटौती का कोई सवाल नहीं, बशर्ते कि उस प्रदर्शन से किसी की जिंदगी न प्रभावित हो। इस पर वकील साल्वे ने कहा, कोई भी अधिकार अपने आप में असीमित नहीं है, अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार की भी सीमाएं हैं।

इस बीच वकील हरीश साल्वे ने लोगों की नौकरी का हवाला देते हुए कहा कि बॉर्डर बंद होने की वजह से लोग पड़ोसी राज्यों में अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं जिस वजह से लोगों का रोजगार छिन रहा है। इस पर सीजेआई ने कहा, हम कमेटी बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसमें स्वतंत्र लोग हों। कमेटी के लोग किसानों से बातचीत कर अपनी रिपोर्ट दें, इस बात का ध्यान रखा जाए कि पुलिस हिंसा ना करे। प्रदर्शन जारी रहे लेकिन रास्ता जाम नहीं होना चाहिए। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि संगठन हां या ना पर अड़े हैं।

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