भोपाल। मध्य प्रदेष में कमल नाथ के सीएम पर से इस्तीफा देने के बाद भाजपा में नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। अब भाजपा सरकार बनाने की तैयारी में है लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर आपस में ही खींचतान होने लगी है। फिलहाल सारे मोर्चो पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन अगला सीएम कौन होगा, इसे लेकर भाजपा नेतृत्व ने पत्ते नहीं खोले हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व का फैसला हाईकमान ही करेगा।
- सारे मार्चों पर शिवराज सिंह चैहान आगे, भाजपा नेतृत्व ने नहीं खोले पत्ते
- पार्टी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व का फैसला हाईकमान ही करेगा
संभावित भाजपा सरकार में मंत्री पद के लिए भी दावेदारों के बीच जोर-आजमाइश शुरू हो जाएगी। सिंधिया गुट के जिन 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उनमें से भी कुछ को मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि उन्हें छह माह में विधानसभा उपचुनाव जीतना होगा, तभी मंत्री पद कायम रह सकेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कांग्रेस का दामन छोड़ने के बाद ये तय माना जा रहा है कि अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी।भाजपा की तरफ से अभी मुख्यमंत्री पद के चार दावेदार सक्रिय हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को तो सीएम पद का दावेदार माना ही जा रहा है। 13 साल तक प्रदेश की बागडोर संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को चैथी बार भी मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है। साथ में ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से नरेंद्र सिंह तोमर को भी भेजा जा सकता है। वहीं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी सीएम की दौड़ में शामिल हैं।
शिवराज सिंह : माना जा रहा है कि जिस तरह से भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को पार्टी ने अब तक सभी मोर्चो में आगे किया हुआ है, उसी तरह सरकार बनने पर प्रदेश की कमान भी उन्हें सौंपी जा सकती है। ऐसा हुआ तो चैहान प्रदेश में चैथी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले राजनेता होंगे। चैहान को सीएम की दावेदारी में पहले स्थान पर रखने वालों का दावा है कि प्रदेश में बड़ी तादाद में उपचुनाव होना है, ऐसी परिस्थितियों में चैहान ही उपचुनाव में विजय दिलवा सकते हैं।
नरेन्द्र सिंह तोमर: मोदी सरकार में लंबे समय से केंद्रीय मंत्री पद संभाल रहे नरेंद्र सिंह तोमर को भी मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है। तोमर पहले भी प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वे दो बार भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभाल चुके हैं। कार्यकर्ताओं और विधायकों से भी तोमर का गहरा नाता है। जहां आगे उपचुनाव होना हैं, उनमें से अधिकांश सीटें ग्वालियर-चंबल अंचल की हैं। तोमर भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए पार्टी उन पर भी दांव लगा सकती है।
राकेश सिंह: भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह को भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल माना जा रहा है। वे लगभग पौने दो साल तक प्रदेश भाजपा की कमान संभाल चुके हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि हाईकमान उन्हें संगठन में ही रखना चाहता है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की नई टीम में सिंह को स्थान मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। यदि विपरीत हालात बने तो उन्हें भी मप्र भेजा जा सकता है।
नरोत्तम मिश्रा: भाजपा सरकार के दौरान लंबे समय तक संकटमोचक की जिम्मेदारी निभाने वाले पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हैं। मिश्रा पहले भी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक नरोत्तम मिश्रा और शिवराज सिंह चैहान के बीच गहरे मतभेद रहे हैं, लेकिन सरकार के लिए जोड़-तोड़ के दौरान दोनों नेताओं के बीच अघोषित समझौता हो गया। सूत्रों के मुताबिक चुनाव के बाद भी शिवराज ने नरोत्तम के नाम का विरोध किया था और इसी वजह से नेता प्रतिपक्ष का पद गोपाल भार्गव को दिया गया। मिश्रा का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी प्रस्तावित था, लेकिन आरएसएस के करीबी माने जाने वाले वीडी शर्मा को जिम्मेदारी मिली।





































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