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राम मंदिर में दीपोत्सव की भव्य तैयारी: तीन लाख दीपों से जगमगाएगा परिसर, फूलों से सजेंगे 16 मंदिर

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70 एकड़ के राम मंदिर परिसर में तीन दिन तक होगी विद्युत सजावट; 13 एकड़ में विकसित होगी पंचवटी, रामायणकालीन 149 प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।

अयोध्या। भगवान राम की नगरी अयोध्या में दीपोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष राम मंदिर परिसर में दीपोत्सव भव्य स्तर पर मनाया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर के 16 मंदिरों को फूलों से सजाने की योजना है। साथ ही पूरा परिसर तीन दिनों तक विद्युत सजावट से जगमग रहेगा। राम मंदिर परिसर में करीब तीन लाख से अधिक दीपक जलाने की तैयारी की जा रही है।

राम मंदिर की धार्मिक समिति के सदस्य महंत कमल नयन दास ने बताया कि भगवान राम के लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मठ-मंदिरों में भव्य दीपोत्सव मनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत राम मंदिर के 70 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले परिसर में इस वर्ष तीन लाख से अधिक दीप जलाने की तैयारी है।

दीपोत्सव को लेकर संतों-महंतों में उत्साह

महंत कमल नयन दास ने बताया कि राम मंदिर परिसर में जलाए जाने वाले दीपक प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था और श्रद्धा के प्रतीक होंगे। परिसर को अल्पना से भी सजाया जाएगा। संतों-महंतों में राम मंदिर में दीपोत्सव को लेकर खासा उत्साह है।

उन्होंने बताया कि दीपक जलाने के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया जाएगा, जिससे मंदिर के पत्थरों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। सजावट और दीप प्रज्ज्वलन के दौरान मंदिर की संरचना की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा।

दीपोत्सव से पहले ही बढ़ने लगी श्रद्धालुओं की भीड़

राम मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या दीपोत्सव से पहले ही बढ़ने लगी है। मंदिर सूत्रों के मुताबिक, इन दिनों प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं के जत्थे अयोध्या आ रहे हैं।

चेन्नई से पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि वह 45 लोगों के समूह के साथ रामलला के दर्शन करने आए हैं। गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर में चढ़ावे की राशि में भी वृद्धि हुई है।

राम मंदिर परिसर की हरियाली बनी आकर्षण का केंद्र

राम मंदिर में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश के बाद अब लोग मुख्य मंदिर के साथ परिसर में स्थित अन्य मंदिरों और सप्त ऋषि मंडप के सातों मंदिरों के भी दर्शन कर रहे हैं। इसके साथ ही परिसर में विकसित की गई हरियाली भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

करीब 70 एकड़ में फैले मंदिर परिसर के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में हरियाली विकसित की गई है। इसमें 13 एकड़ क्षेत्र में पंचवटी तैयार की जा रही है, जहां रामायण काल से जुड़े पौधे लगाए जाएंगे।

जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं कराती हैं रामायण काल का अनुभव

राम मंदिर परिसर में फिलहाल हरी घास और पुराने वृक्षों की हरियाली इसकी सुंदरता बढ़ा रहे हैं। परिसर की लैंडस्केपिंग और हरित क्षेत्र को विकसित करने का काम जीएमआर कंपनी कर रही है।

हरियाली से सजे कुबेर टीला और शेषावतार मंदिर के साथ जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को रामायण काल की स्मृतियों से जोड़ती हैं। परिसर का प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक संरचनाएं यहां आने वाले लोगों को आकर्षित कर रही हैं।

पंचवटी में लगाए जाएंगे रामायणकालीन 149 प्रजातियों के पौधे

मंदिर सूत्रों के मुताबिक, 13 एकड़ में विकसित की जा रही पंचवटी में संजीवनी बूटी, नागकेसर, ब्राह्मी, अर्जुन और तुलसी समेत रामायण काल से जुड़ी 149 प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा एशियाई देशों और श्रीलंका से भी मंगाने की योजना है। परिसर की अशोक वाटिका में भी विशेष प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हैं।

श्रद्धालुओं के साथ शोधार्थियों के लिए भी बनेगी खास जगह

पंचवटी को केवल प्राकृतिक स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से भी विकसित किया जाएगा। योजना के तहत प्रत्येक पौधे के साथ उससे जुड़ी रामायणकालीन कथा और वैज्ञानिक जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी।

इससे पंचवटी श्रद्धालुओं के साथ-साथ शोधार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकेगी। राम मंदिर परिसर में रामायण काल से संबंधित 500 से अधिक पौधों के रोपण की योजना बनाई गई है।