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साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच: डॉ. रक्षित टंडन

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  • उद्योग जगत को साइबर फ्रॉड, डीपफेक, ईमेल स्पूफिंग और डेटा सुरक्षा के खतरों से किया आगाह।

आगरा। डिजिटल होती अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर लगातार बढ़ते साइबर खतरों के बीच आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैम्बर (AFMEC) द्वारा साइबर शील्ड 2026 – साइबर सिक्योरिटी एंड साइबर क्राइम प्रिवेंशन फॉर इंडस्ट्री’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन द पीएल पैलेस होटल, संजय प्लेस, आगरा में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों को साइबर अपराध के बदलते स्वरूप से अवगत कराने के साथ उनके व्यवसाय, डेटा, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल संपत्तियों को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम के प्रारंभ में AFMEC के उपाध्यक्ष राजीव वासन एवं राजेश सहगल ने मुख्य वक्ता एवं अंतरराष्ट्रीय साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन का स्वागत एवं सम्मान किया। AFMEC के पूर्व अध्यक्ष कैप्टन ए.एस. राणा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि आज कारोबार का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों पर निर्भर है, ऐसे में साइबर सुरक्षा उद्योग जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. रक्षित टंडन, कंसल्टेंट–साइबर क्राइम, मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस एवं अंतरराष्ट्रीय साइबर विशेषज्ञ ने अपने विशेष सत्र में साइबर अपराध के तेजी से बदलते स्वरूप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग, डीपफेक, ईमेल स्पूफिंग, फिशिंग, बैंकिंग फ्रॉड, पासवर्ड लीक और फर्जी ऑनलाइन निवेश जैसे खतरों को वास्तविक मामलों के माध्यम से विस्तार से समझाया।

उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि किसी भी संस्था के प्रबंधन से लेकर प्रत्येक कर्मचारी तक सभी की साझा जिम्मेदारी है। एक छोटी सी डिजिटल लापरवाही किसी कंपनी को गंभीर आर्थिक नुकसान के साथ उसकी प्रतिष्ठा और महत्वपूर्ण डेटा के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।

डीपफेक और AI के दुरुपयोग से बढ़ रहा नया खतरा
डॉ. टंडन ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के साथ डीपफेक आधारित धोखाधड़ी भी तेजी से सामने आ रही है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से जुड़ा एक डिजिटल रूप से परिवर्तित वीडियो उदाहरण के रूप में दिखाया, जिसमें कथित निवेश कार्यक्रम का भ्रामक प्रचार किया जा रहा था। उन्होंने आगाह किया कि किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति की आवाज या वीडियो देखकर तुरंत उस पर भरोसा न करें और निवेश अथवा वित्तीय लेन-देन से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि अवश्य करें।

एक अक्षर की गलती और करोड़ों का नुकसान, ONGC केस से समझाया ईमेल स्पूफिंग
ईमेल स्पूफिंग और बिजनेस ईमेल फ्रॉड की गंभीरता बताते हुए डॉ. टंडन ने ONGC से संबंधित एक केस का उदाहरण साझा किया। इसमें आधिकारिक ईमेल आईडी patel_dv@ongc.co.in से मिलती-जुलती patel_dv@ognc.co.in जैसी फर्जी ईमेल आईडी का इस्तेमाल कर संवाद को प्रभावित किया गया। बैंकिंग विवरण में बदलाव और अन्य बहानों के माध्यम से करीब ₹97 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया।

उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों को सलाह दी कि बैंक खाते या भुगतान संबंधी निर्देश में किसी भी बदलाव को केवल ईमेल के आधार पर स्वीकार न करें। बड़ी रकम के भुगतान से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था से दूसरे सत्यापित माध्यम से पुष्टि करना आवश्यक है।

डेटा ब्रीच और पासवर्ड लीक भी गंभीर चुनौती
सत्र के दौरान बैंकिंग क्षेत्र में सामने आए डेटा सुरक्षा संबंधी मामलों पर भी चर्चा की गई। बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़े एक उदाहरण में कर्मचारी के सिस्टम के प्रभावित होने और उससे उत्पन्न साइबर सुरक्षा जोखिमों को समझाया गया। साथ ही इंटरनेट पर लगभग 16 बिलियन यूजरनेम एवं पासवर्ड से जुड़े क्रेडेंशियल्स के उजागर होने की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि ऐसे डेटा का उपयोग अकाउंट टेकओवर, फिशिंग और अन्य ऑनलाइन अपराधों में किया जा सकता है।

डॉ. टंडन ने अलग-अलग ऑनलाइन सेवाओं के लिए अलग पासवर्ड रखने, मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय करने तथा संदिग्ध लिंक, ईमेल और अटैचमेंट से सतर्क रहने पर विशेष जोर दिया।

फर्जी निवेश और टेलीग्राम ग्रुप के जाल से रहें सावधान
कार्यशाला में ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी का उदाहरण देते हुए तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो से जुड़े एक मामले की भी चर्चा की गई, जिसमें एक 49 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कथित निवेश सलाहकारों द्वारा टेलीग्राम ग्रुप और फर्जी निवेश वेबसाइटों के माध्यम से करीब ₹3.30 करोड़ की ठगी किए जाने का मामला सामने आया था।

डॉ. टंडन ने कहा कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या अनजान ऑनलाइन ग्रुप में मिलने वाले असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के निवेश प्रस्तावों से विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है।

‘CyberSurakshit’ का संदेश जागरूक कर्मचारी ही पहली सुरक्षा दीवार
CyberSurakshit अभियान का संदेश देते हुए डॉ. टंडन ने कहा कि तकनीकी सुरक्षा उपायों के साथ मानव जागरूकता साइबर सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए नियमित साइबर सिक्योरिटी प्रशिक्षण, डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल और साइबर फ्रॉड की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की स्पष्ट व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा जागरूकता के क्षेत्र में डॉ. रक्षित टंडन के योगदान की सराहना की गई। विभिन्न पुलिस विभागों के साथ उनके प्रशिक्षण एवं जागरूकता अभियानों तथा गुरुग्राम पुलिस साइबर सिक्योरिटी समर इंटर्नशिप में 12,000 से अधिक इंटर्न को प्रशिक्षित करने जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर AFMEC के महासचिव प्रदीप वासन ने धन्यवाद किया। इस मौके प्रमुख रूप से AFMEC पूर्व अध्यक्ष कैप्टन ए.एस. राणा, पूर्व अध्यक्ष एवं कन्वीनर पूरन डावर, नजीर अहमद, अनुरुद्ध तिवारी, उपेंद्र सिंह लवली – प्रदेश अध्यक्ष CIFI तथा AFMEC कोषाध्यक्ष चंद्रमोहन सचदेवा उपस्थित रहे।