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इंटरनेट की डार्क वेब की दुनिया में बिक रही आपकी प्रोफाइल मात्रा 140 रूपए प्रति दिन में

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  • डार्क वेब में आपकी प्रोफाइल 140 रुपये/दिन में बिक रही है
  • डार्क वेब को सिर्फ ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर से ही ऐक्सेस किया जा सकता है
  • यूजर्स के चोरी हुए डेटा में पासवर्ड, फोन नं. व ईमेल शामिल हैं
  • 3 तरह के ग्रुप द्वारा एक सेंट्रल सर्वर के जरिए डेटा को बेचा जा रहा है

क्या आपको पता है कि वर्ल्ड वाइड वेब की ‘काली दुनिया’ में आपकी प्रोफाइल बिक्री के लिए उपलब्ध है। खास बात है कि न सिर्फ हैकर्स और ठग बल्कि कंपनियां और मार्केट रिसर्चर भी इस डेटा को खरीद रहे हैं। क्या आपको अंदाजा भी है कि आपके इस डेटा की कीमत क्या लगी है? मात्र 140 रुपये प्रतिदिन।

‘डार्क वेब’ नाम की यह दुनिया रेगुलर ब्राउजर्स के जरिए ऐक्सेस नहीं की जा सकती। सिर्फ टॉर जैसे ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर जो कि अनजान कम्युनिकेशन की अनुमति देते हैं, उनके जरिए ही डार्क वेब को ऐक्सेस किया जा सकता है। इंटरनेट के इस छिपे हुए हिस्से में, हैकर्स इंटरनेट यूजर की जानकारी मुहैया करा रहे हैं। इनमें पासवर्ड, टेलिफोन नंबर और ईमेल आईडी जैसी जानकारियां शामिल हैं।

3 ग्रुप कर रहे हैं डेटा सेल
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस डेटा को पाने वालों में साइबर अटैक करने वाले, कंज्यूमर बिहेवियर को ट्रैक करने वाले और वो लोग शामिल हैं जो उन विडियो स्ट्रीमिंग साइट्स का मुफ्त ऐक्सेस चाहते हैं जिनका भुगतान आपने किया है।
चिंता की बात यह है कि ऐसे डेटा को उन कंपनियों द्वारा खरीदा जा रहा है जो अपने प्रतिद्वंदियों के कंज्यूमर बेस की जानकारी पाना चाहती हैं। ये कंपनियां संवेदशनशील और क्रूशल डेटा रखने वाली अपनी विरोधी कंपनियों की मुख्य एग्जिक्युटिव को भी ट्रैक करना चाहती हैं।

हैकर्स का एक ग्रुप जहां इनक्रिप्टेड पासवर्ड्स के साथ डेटा लीक करता है, वहीं दूसरा ग्रुप उन्हें डीक्रिप्ट करता है। एक स्वतंत्र साइबर सिक्यॉरिटी रिसर्चर का कहना है, ‘अब एक तीसरा ग्रुप इन डीक्रिप्टेड पासवर्ड की लिस्ट बना रहा है और इन्हें एक सेंट्रल सर्वर पर स्टोर करता है। यहां से डेटा ब्रीच होता है और हैकर्स के लिए यह एक कॉमन सोर्स के तौर पर काम करता है।’

सिंगल पासवर्ड इस्तेमाल करना है सबसे बड़ी कमजोरी
अगर आप अपने कई अकाउंट्स के लिए एक सिंगल पासवर्ड या फिर थोड़े से अलग पासवर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप काफी कमजोर हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हैकर्स ने सिर्फ छोटी वेबसाइट्स से ही 7,000-8,000 डेटाबेस इकट्ठा कर लिया है। इनमें बड़ा साइट्स से चोरी किया गया डेटा शामिल नहीं है।

यूजर डेटा को कई अलग-अलग पैकेज के जरिए बेचा जाता है। इन्हें एक दिन के लिए 2 डॉलर (140 रुपये) और 3 महीने के लिए 70 डॉलर (4,900 रुपये) के पैकेज मिलते हैं। ग्राहक क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन,लाइटकॉइन, डैश, रिपल, ईदरियम और ज़ेडकैश के जरिए भुगतान करते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी हैकर को एक यूजर के मल्टीपल पासवर्ड मिल जाते हैं तो वह किसी प्रोफाइल को मिनटों में बिक्री के लिए उपलब्ध करा सकता है। कई यूजर्स अकसर मल्टीपल अकाउंट्स के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं, इससे उनके बिहेव का अनुमान लगाया जा सकता है। यूजर डेटा को ट्रैक करना इंटरनेट पर किसी व्यक्ति के ऐक्टिविटी लेवल पर ही निर्भर करता है।

एक्सपर्ट्स कहते हैं, ‘अगर कोई यूजर किसी वेबसाइट पर अलग-अलग अकाउंट्स का इस्तेमाल करता है तो इंटरनेट पर कम समय खर्च करने वाले व्यक्ति की तुलना में उसके ऑनलाइन डेटा को इकट्ठा करना आसान रहता है।’

आम यूजर और सिलेब्रिटी यूजर के डेटा का दाम
साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट कहते हैं, ‘रेगुलर यूजर का पासवर्ड आमतौर पर 1 रुपये में ही मिल जाता है, लेकिन हाईप्रोफाइल सिलेब्रिटी जैसे राजनेताओं या बॉलिवुड स्टार के डेटा को 500-2,000 रुपये में बेचा जाता है।’ एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेटा चोरी के खिलाफ कड़े कानून से ही इस पर रोक लगाई जा सकती है।

क्विक हील में चीफ टेक्नॉलजी ऑफिसर संजय काटकर का कहना है कि यूजर को मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करने के साथ ही फिशिंग और स्पैम मेल खोलने से बचना चाहिए। इसके अलावा, जब कंपनियों से डेटा हैक व चोरी होता है, तो उन्हें जवाबदेह होना चाहिए। डेटा चोरी की कई घटनाओं के बावजूद, कंपनियों ने अभी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं झे

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