लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को रिश्तों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। गुरुवार को लखनऊ स्थित महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि युवाओं को रिश्ते बनाते समय उनकी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। उन्होंने आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और महिलाओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा, “गर्लफ्रेंड बनाने में बुराई नहीं है। गर्लफ्रेंड बनाओ तो शादी भी करो। लड़की को मां बनाकर छोड़ना गलत है।” उन्होंने कम उम्र में लड़कियों के मां बनने और फिर उन्हें बेसहारा छोड़ दिए जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पहले अपने पैरों पर खड़े हों, आर्थिक रूप से सक्षम बनें और परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए तैयार रहें।
रिश्तों में जिम्मेदारी निभाने पर दिया जोर
आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को संदेश दिया कि किसी भी रिश्ते में जुड़ने के साथ उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को स्वीकार करना भी जरूरी है। उनके बयान का मुख्य जोर महिलाओं और बच्चों को असुरक्षित परिस्थितियों में छोड़ने के बजाय उनके प्रति जिम्मेदारी निभाने पर रहा।
लिव-इन रिलेशनशिप पर पहले भी दे चुकी हैं बयान
राज्यपाल की ये टिप्पणियां रिश्तों और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर उनके पहले दिए गए बयानों के संदर्भ में भी देखी जा रही हैं। अक्टूबर 2025 में बलिया और वाराणसी में विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों के दौरान उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चिंता जताई थी। बलिया में उन्होंने इस तरह के रिश्तों के संभावित परिणामों का उल्लेख करते हुए अनाथालयों में बच्चों की स्थिति का उदाहरण दिया था।
उनकी इन टिप्पणियों के बाद लिव-इन रिलेशनशिप, विवाह और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू हुई थी।
महिलाओं की भूमिका पर बयान से भी हुआ था विवाद
जुलाई 2026 में कानपुर में आयोजित एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान महिलाओं की भूमिका को लेकर की गई उनकी टिप्पणी भी चर्चा में रही थी। उस कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं को करियर के साथ मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के महत्व पर विचार करने की सलाह दी थी।
आनंदीबेन पटेल ने अपने विभिन्न बयानों में महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया है। हालांकि, उनकी टिप्पणियों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और महिलाओं के जीवन से जुड़े फैसलों में उनकी पसंद के अधिकार को लेकर भी बहस को जन्म दिया है।
राज्यपाल के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि युवाओं को रिश्तों और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए किस तरह प्रोत्साहित किया जाए, ताकि महिलाओं और बच्चों के अधिकारों तथा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।




































